4 Tips: डर को कैसे दूर भगायें और सफलता पायें

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dar ko kaise dur bhagaye
Dar ko kaise dur bhagaye : Image By Zac Durant on Unsplash

दोस्तों, डर एक ऐसी चीज़ है जिससे कोई भी अछूता नहीं है। बच्चों से ले कर बड़ों तक, और बड़ों से लेकर बूढ़ों तक सबने अपनी ज़िंदगी मे डर का सामना किया है। डर एक ऐसा factor है जिससे अगर आप चिपक गए तो आजीवन असफलता का मुँह देखेंगे।

अगर आप गहराई से सोचेंगे तो पाएंगे कि डर का जन्म इंसान के जन्म के साथ ही हो जाता है। बच्चा जब बड़ा होता है तब उसे अंधेरे से डर लगता है। बच्चा अगर कुछ गलत सीखता है या गलत करता है तो माँ बाप उसके अंदर पिटाई का डर पैदा करते है।

यही डर बचपन से पनपता रहता है और जवानी मे इंसान को कस कर जकड़ लेता है। वयस्क हो जाने पर तो डर का अंबार जैसा लग जाता है। हर जगह, हर activity मे डर नज़र आने लगता है। पहले पढ़ाई मे फेल होने का डर, फिर नौकरी न मिलने का डर। नौकरी अगर मिल भी गई तो प्रमोशन न होने का डर।

आप जहां भी देखेंगे हर जगह डर ही नज़र आयेगा। डर ने इन्सानो को आगे बढ़ने से रोक रखा है। वयस्कों मे असफ़ल होने का डर इस हद तक घर कर चुका है कि लोग असफ़ल हो जाने पर आगे प्रयास करना ही छोड़ देते हैं। कुछ लोग तो मानसिक बीमार हो जाते हैं और आत्महत्या तक की सोच लेते हैं।

मैं, आप लोगों को कुछ ऐसी टिप्स बताने जा रहा हूँ जिन पर अगर आप अमल कर लें तो डर से सदा के लिए दूर हो जाएंगे और मनचाही – सफल ज़िंदगी जी पाएंगे।

डर कहीं और नही, आपके दिमाग मे है

ये बात शत प्रतिशत सही है कि डर कहीं भी नहीं है। ये तो केवल एक भयावह कल्पना है जो आपके दिमाग मे है। अगर आप पहले से ही ठान लें कि कुछ भी हो जाये आप डरेंगे ही नहीं, तो आप सच में डर का मुक़ाबला कर पाएंगे। हक़ीक़त तो यही है कि हम पहले ही अपने मन मे डर को बसा कर रख लेते हैं, और बाद मे कहते हैं कि अमुक काम नहीं हो पायेगा। इसलिए अपने दिमाग को थोड़ा काम दीजिये, डर को बाहर निकालने का साहस भरिए। आप जैसे ही डर को अपने दिमाग से निकालेंगे वैसे ही आपको आपकी चमत्कारिक शक्तियों का एहसास होगा।

आत्मविश्वास बढ़ाएँ और डर से बिलकुल भी न डरें

आपको पहले ही बताया जा चुका है कि डर बस आपके दिमाग की उपज है। इसलिए आप अपना आत्मविश्वास जगायें और इससे दूर रहने की प्रतिज्ञा कर लें। एक आत्मविश्वास अकेली ऐसी चीज़ है जो अगर आप मे आ जाये तो आप क्या नहीं कर देंगे ये आपने सोचा भी नहीं होगा। आप एक बात गाँठ बांध लें, आत्मविश्वास और डर दोनों एक साथ कभी रह ही नहीं सकते। दोनों एक दूसरे के कट्टर विरोधी हैं। अब ये आप के ऊपर निर्भर करता है कि आप किसे अपने मन मे बसाना चाहते हैं। आप जो चाहेंगे वही मूर्तरूप मे आपके सामने आयेगा।

अज्ञानता से दूर रहें

कभी आप ने जानने की कोशिश की है कि डर क्यों लगता है? जब आप चिंतन करेंगे तो पाएंगे कि आप जिन चीजों से डर रहे हैं, वो या तो हैं ही नहीं या फिर केवल आपकी कल्पना हैं। ऐसा तभी होता है जब आप को जानकारी नहीं होती। आप सच्चाई और वास्तविकता से अनभिज्ञ रहते हैं।

जिस विषय मे आपको भय हो या डर लगता हो, आप उसकी पूरी जानकारी पहले ही कर लें। जब आप पहले ही तैयार हो जायेंगे तो डर आपके निकट कभी नहीं आयेगा। डर सदैव अज्ञानता से पैदा होता है, इसलिए अपना ज्ञान बढ़ाये और डर को दूर भगाएँ।

डर का सामना कीजिये

डर से अगर जीतना चाहते हैं तो आपको इसे फ़ेस करना होगा। आपको डर के विरुद्ध खड़े होना पड़ेगा और मन मे विश्वास जगाना होगा। हौसला रखिए और डर का सामना करने के लिए तैयार रहिए। अगर आप इसी संकल्प के साथ कार्य करेंगे तो डर कब आपकी आँखों से ओझल हो जाएगा, आपको पता भी नहीं चलेगा। कितनी हास्यास्पद बात है, जो हक़ीक़त में है ही नहीं , हम उसी से डर रहे हैं? मुझे नहीं लगता आपको डर से इतना घबराना चाहिए। आपका विश्वास, डर से कहीं ज्यादा बड़ा है, खुद पर भरोसा रखिए और आगे बढ़िए।


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